पाकिस्तान के साथ संबध इस समय क्रिकेट खेलने का कोई औचित्य नहीं
क्रिकेट टीम का चार जनवरी से आरंभ होने वाला पाकिस्तान दौरा रद्द किया जाना इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट एवं तनाव कितना बढ़ा हुआ है। सामान्यत: दो देशों के बीच राजनीतिक संबंध सामान्य न होने की हालत में भी खेल संबंध जारी रहता है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां दो देशों के संबंध तो तनावपूर्ण थे, पर उनके खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरते रहे। भारत पाकिस्तान के बीच भी ऐसा हो चुका है। खेल स्वयं तनाव शैथिल्य का आधार बन जाता है। वास्तव में दो देशों के बीच संबधों को सामान्य बनाने के लिए खेल भी आधुनिक कूटनीति का अंग हो गया है। कुल मिलाकर खेल संबंध स्थगित किया जाना दो देशों के बीच तनाव की उच्च अवस्था का सबूत माना जाता है। इसलिए क्रिकेट टीम का दौरा रद्द किया जाना ऊपर तौर पर जितनी छोटी घटना लगे यह व्यवहार में अत्यंत ही गंभीर कदम है। इससे पता चलता है कि मुंबई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियां कितनी तेजी से बढ़ी हैं।प्रश्न किया जा सकता है कि आखिर खेल को राजनीति से जोड़ने का क्या तुक है? बेशक, खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। किंतु यहां किसी सामान्य राजनीति का नहीं भारत की सुरक्षा का, उसकी एकता-अखंडता बनाए रखने का मूल प्रश्न निहित है। आतंकवादी पाकिस्तान से आकर हमारे देश पर हमला करें, बेगुनाहों का रक्त बहाएं, करोड़ों की संपत्तियां स्वाहा करें, देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोिशश करें और हम उनके साथ खेल के मैदान में उतरें यह संभव नहीं है। हमारे लिए सबसे चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान की वर्तमान सरकार की ओर से भारत की भावना तक को सम्मान देने की पहल नहीं हो रही। उल्टे हमले से लहूलुहान और स्वाभाविक गुस्से से भरे देश पर पाकिस्तान की सरकार विश्वास तक करने को तैयार नहीं है। हमारी सरकार कहती है कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए, पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल आमिर ईमान कसब के फरीदकोट के एक गांव तक का पता दिया जा रहा है और पाकिस्तन की सरकार कहती है कि उसके पाकिस्तानी होने का कोई सबूत नहीं है। ऐसे में संबंधों का अर्थ क्या है। संबंधों की पहचान तो ऐसे कठिन मौकों पर ही होती है। आपकी भूमि पर हमारे खिलाफ आतंकवादी साजिशें रची जाएं, उसको अंजाम देने के लिए भी आतंकवादी वहीं से आएं और आप उसकी छानबीन कर सही तथ्य जुटाने एवं दोषियों को सजा मिलने में सहयोग की जगह पूरी बात को ही झुठलाते रहें तो इसका अर्थ तो यही है कि हम पर हुए हमलों से आपके मन में न कोई दु:.ख है और न चिंता ही।इनमें यहां विस्तार से जाने की आवश्यकता नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसे माहौल में क्रिकेट टीम को भेजा नहीं जा सकता था। खेल के पीछे खेल भावना होनी चाहिए। यह खेल भावना ही है जो मनुष्य को जय पराजय की भावना से ऊपर उठाती है। खिलाड़ी या पूरी टीम प्रतिस्पर्धा तो करती है जीत के लिए ही, लेकिन पराजित होने पर भी उसमें विनाशक प्रतिशोध की भावना पैदा नहीं होती। तो खेल भावना का माहौल होना किसी भी खेल के मूल में है। यह भावना खिलाड़ियों के साथ दशZकों में भी होना चाहिए। साफ है कि इस समय के हालात में खेल भावना का ऐसा माहौल पैदा नहीं हो सकता है। ऐसे समय में खिलाड़ी खेल भावना से खेल भी नहीं सकते। भारत एवं पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों के लिए इससे क्षणिक निराशा हो सकती है। किंतु खेल तो राष्ट्र जीवन का एक छोटा पहलू है। यहां तो भारत नामक राष्ट्र के अपनी समस्त अनूठी बहुविध विशेषताओं के साथ जीवित रहने का प्रश्न है। खेल देश के लिए है, देश खेल के लिए नहीं। भारत सरकार इस समय पाकिस्तान पर हर प्रकार के दबाव की कूटनीति अिख्तयार कर रही है ताकि वह आतंकवादी समूहों एवं उनके नेताओं के विरुद्ध ठोस कारZवाई को मजबूर हो। इससे ही भारत की सुरक्षा सुनििश्चत हो सकती है। वैसे स्वयं पाकिस्तान की सुरक्षा का सूत्र भी इसी मेंं निहित है। क्रिकेट टीम भेजने से दबावकारी कूटनीति कमजोर हो सकती थी और इसका अर्थ सुरक्षा पर खतरा बनाए रखना होता। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को यकीनन इससे गहरा धक्का लगा है। कई देशों की टीमों का दौरा रद्द होने से उसकी वित्तीय हालत खराब है। भारत के साथ श्रृंखला से उसे करीब दो करोड़ डॉलर आय की संभावना थी। इसके समाप्त हो जाने से उसकी समस्याएं और बढ़ गईं हैं। किंतु यह चिंता तो पाकिस्तान के खेल प्रेमियों को होनी चाहिए। आखिर भारत आतंकवादी हमलों के लिए इतनी मनगढंत बातें क्यों बोेलेगा? जो भारत स्वयं पहल करके पाकिस्तान के साथ व्यापक बातचीत की प्रक्रिया शुरु कर सकता है, जो दोनों देशों के नागरिकों का संपर्क बढ़ाने के लिए अनेक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन दे सकता है वह क्यों चाहेगा कि हमारे संंबंध बिगड़ जाएं? पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों को भी यह सोचना चाहिए कि किस मन:स्थिति में भारत को ऐसा निर्णय लेना पड़ा है। क्या वे पाकिस्तान में आतंकवादियोें के अस्तित्व को नहीं जानते। वे अपनी सरकार पर दबाव बढ़ाकर हमले के दोषियों को सामने लाने के लिए आगे आ सकते हैं। अगर उनके अंदर यह भावना नहीं है तो फिर उन्हेंं भारत के साथ खेल का लाभ और लुत्फ उठाने से वंचित होना ही चाहिए।बेशक, यह िZस्थति दुर्भाग्यपूर्ण है, किंतु पाकिस्तान सरकार के वर्तमान रुख को देखते हुए इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। जो स्थिति है उसमें बात और बिगड़ सकती है। देखा जाए तो दोनों देशों के संबंध एक प्रकार से घूमकर आठ सालों में फिर वहीं पहुंच गया है जहां वह संसद हमले के बाद था। तब खेल से लेकर यातयात तक के संबंध तोड़ दिए गए थे। तो क्या धीरे-धीरे सब कुछ उसी दिशा में बढ़ रहा है? अभी एकदम नििश्चत तौर पर कुछ कहना कठिन है। कम से कम अभी भारत सरकार ने सीमा पर फौज को युद्ध की अवस्था में तैनात करने का निर्णय नहीं लिया है। किंतु कल क्या होगा कहना कठिन है। भारत सरकार का रुख स्वाभाविक तौर पर कड़ा है और पाकिस्तान भले आक्रामक बयान नहीं दे रहा है, पर उसका रवैया भारत की हर बात को सिरे से नकारने वाला है। यह रवैया कतई भारत की भावनाओं को समझने वाला नहीं है। ऐसे में सांस्कृतिक संबंघ पूरी तरह सिमट सकता है। इसकी जिम्मेवारी पाकिस्तान की ही होगी। भारत सरकार द्वारा क्रिकेट टीम का दौरा रद्द करने का निर्णय मजबूरी मेंं लिया गया है,क्योंकि इसके अलावा कोई विकल्प है ही नहीं।
7 टिप्पणियां:
हिदीं लिखाडि़यों की दुनिया मे आपका स्वागत। अच्छा लिंखे। बढि़या लिखे। हा्र्दिक शुभकामनांए।
bilkul khelne kaa koi matalab nahin. paakistan jab tak apani harakaton se baaz naa aajae tab tak paakistan se koee samjhoutaa nahin honaa chaihe, our anya videshon ko bhee chaahie ki paakistan ko sabak sikhane men bhaarat ki bharpoot madad karen>
सच कहा है
बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
http://www.manojsoni.co.nr और http://www.lifeplan.co.nr
मुझे लगता है की इस बार हम भारतीयों को अधिक गुस्सा इसलिए आया है क्योंकि इस बार क्रिकेट पर असर पड़ा है....
वैसे भी जब हमारा देश कारगिल का युद्ध लड़ रहा था तब भी देशवासी वर्ल्ड कप में खोये हुए थे तभी तो वर्ल्ड कप के मैच दिखने वाले चेनलस की टी आर पी किसी भी न्यूज़ चेंनेल या कारगिल सम्बंधित कार्यक्रम से ज्यादा थी....
Namskar!
aap sab ki pratikriya ke liye dhanyavad!
jahan bhi jata log poochhate the ki aapaka koi blog ya website hai ya nahin. Samay ke abhav mein yah ho nahon pa raha tha. kisi tarah ek blog aa gaya hai. abhi is par wahi tippaniyan de raha hoon jo main akhabaron ya patrikaon ko deta hoon. unake chhapane ke pahale dena peshagat anaitikata hogi, so usake bad hi post karata hoon. blog ke liye alag se likhane ka samay nikalana mere se abhi sambhav nahin hai. koshish hai ek samagra website aa jaye jisamein paripoorna matters hon.
Adarsahit
Awadhesh Kumar
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूंऽऽऽऽऽऽऽ
और बधाई भी देता चलूं...
आपका ब्लॉग देखा बहुत अच्छा लगा.... मेरी कामना है कि आपके शब्दों को नए अर्थ, नए रूप और विराट संप्रेषण मिलें जिससे वे जन-सरोकारों के समर्थ सार्थवाह बन सकें.......
कभी फुर्सत में मेरे ब्लॉग पर भी पधारें...
http://www.hindi-nikash.blogspot.com
सादर- आनंदकृष्ण, जबलपुर
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