पश्चिम एशिया की हिंसा
इजरायल द्वारा गाजा पट्टी पर लगातार बमबारी से वहां जो कोहराम मचा है वह यकीनन चिंताजनक है, पर इसे अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता। इस समय इस्राइल हमलावर दिख रहा है और उसकी निंदा भी हो रही है। हमले के कारण सैंकडों लोग मारे जा चुके हैं और घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि उनका उपचार तक संभव नहीं हो पा रहा है। कुल मिलकार पूरी तस्वीर भयावह है। लेकिन पिछले कई महीनों से हमस के चरमपंथी इस्राइल पर रॉकेटों से हमला कर रहे थे और वे किसी के आग्रह को सुनने तक को नहीं थे। हमला और बातचीत एक साथ नहीं चल सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के लिए जाते-जाते पश्चिम एिशया की यह हिंसा ऐसी टीस दे रहा है जिसे भूल पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। किंतु वहां की स्थिति कितनी जटिल है इसका आभास हम सबको है। फिलीस्तीन में इस समय दो गुटों हमस एवं फतह में बंटा है और यह निष्कषZ निकालना कठिन है कि वाकई कौन उसका प्रतिनिधि है। हमस का नियंत्रण गाजा पट्टी पर है तो फतह का पश्चिमी किनारे पर। इससे फिलीस्तीनियों की समस्याएं बढ़ीं हैं। सच कहा जाए तो स्वतंत्र फिलीस्तीन राज्य के सपने को ध्वस्त करने के लिए ये दो समूह अब ज्यादा दोषी हैं। हमस इस्राइल के अस्तित्व को ही स्वीकर करने को तैयार नहीं है। जब वह इस्राइल का अस्तित्व स्वीकारेगा ही नहीं तो उससे बातचीत कैसे हो सकती है। वस्तुत: हमस आतंकवादी विचारधारा का संगठन है, लेकिन चुनाव परिणामों में उसे सफलता मिली। इससे मामला उलझ गया है। अमेरिका के सामने प्रश्न यही था कि ऐसे समूह से बातचीत की जाए या नहीं। एक ओर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध एवं दूसरी ओर किसी आतंकवादी संगठन के साथ बातचीत को बुश प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया है। वैसे भी हमस लगातार युद्ध की भाषा बोल रहा था। वह इस्राइल को नेस्तनाबूद करने का एलान करते हुए उस पर हमला कर रहा था और इसमें पश्चिमी एिशया में शांति की संभावना दफन हो रही थी। अब इस्राइल ने हमले की समस्या के अंत के नाम पर हमला किया है। वह आसानी से पीछे नहीं हट सकता है। घटनाएं क्या मोड़ लेंगी कहना कठिन है, लेकिन हमस जेहाद के नाम पर जो कुछ कर रहा था उसका भी शमन आवश्यक है। आखिर इस्राइल के सामने चारा क्या है? या तो वह हमस की इच्छा का पालन करते हुए एक राष्ट्र के रुप में अपना अंत कर ले या फिर उसके नाश के लिए हमलावर समूह से मुठभेड़ करे। युद्ध से किसी का भला नहीं होनेवाला इस्राइल का भी नहीं। इसका अंत पश्चिम एिशया एवं दुनिया दोनों के हित में है। किंतु क्या दुनिया में ऐसी कोई शक्ति या संस्था है जो प्रभावी हस्तक्षेप कर इसका अंत करा सके? दुर्भाग्य से कुछ देशों में इस्राइल के खिलाफ प्रदशZन हो रहे हैं तो कहीं लड़ने का आह्वान हो रहा है, पर शांति के लिए हमस को तैयार करने का कोई प्रयास नहीं। क्या ये प्रदशZन करने वाले इजरायल के एक राष्ट्र के रुप में अिस्तत्व समाप्त कर वहां हमस की कल्न्पना के अनुसार वाकई उग्र इस्लामी राज्य की स्थापना के पक्ष में हैं? ऐसी बात तो केवल सिरफिरे जेहादी समूह ही कर सकते हैं।
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