बुधवार, 24 दिसंबर 2008

सही संदेश
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने युद्ध नहीं चाहने का बयान देकर पाकिस्तान सहित विश्वसमुदाय को बिल्कुल सही संदेश दिया है। इसमेें पाकिस्तान के लिए युद्धोन्माद पैदा न करने की नसीहत थी तो दुनिया को यह संदेश देने की कोिशश कि भारत एक जिम्मेवार देश है और वह युद्ध के पक्ष में नहीं। भारत की समस्या आतंकवाद है और इसका केन्द्र पाकिस्तान है। इसलिए मुद्दा तो आतंकवाद है और पाकिस्तान की धरती का इसके लिए पूरा इस्तेमाल हो रहा है। प्रधानमंत्री ने यही तो कहा है कि मुद्दा युद्ध नहीं है। मुद्दा है आतंकवाद और पाकिस्तान की धरती से इसे हर प्रकार से बढ़ावा दिया जा रहा है। वस्तुत: प्रधानमंत्री का कहना सही है कि युद्ध कोई नहीं चाहता लेकिन पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने की कारZवाई तो करनी होगी। प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री दोनों ने पाकिस्तान से युद्वोन्माद पैदा न कर आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। वस्तुत: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल परवेज अश्फाक कियानी का यह बयान भारत में चिंता का कारण बना है कि पाकिस्तान की सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने को तैयार है एवं उनके जवान भी देश के लिए कुबाZन होने को तैयार हैं। ऐसी भाषा युद्ध का माहौल तैयार करती है। यह पाकिस्तान में निर्मित माहौल का ही परिणाम है कि तहरीक-ए-तालिबान के नेता ने कहा है कि भारत द्वारा हमला करने पर तालिबान लड़ाके सैनिकों के साथ लड़ेंगे। प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री दोनों ने अपने बयानों से पाकिस्तान को यही समझाने का प्रयास किया है कि आतंकवाद की समस्या को बाहरी आक्रमण से रक्षा की समस्या मत बनाइए। इन बयानों के बाद पाकिस्तान सरकार को होश आ जाना चाहिए। निस्संदेह, भारत में इस समय पाकिस्तान के खिलाफ माहौल है, लेकिन भारत पाकिस्तान पर हमला करने जा रहा है ऐसा मानने का अभी कोई कारण नहीं है। पाकिस्तानी सेना से लड़ाई हो भी जाए तो उससे आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा ऐसी कल्पना बेमानी है। किंतु आतंकवाद का ढांचा तो नष्ट होना चाहिए। यह कम चिंता का विषय नहीं है कि पाकिस्तान मूल समस्या को दूसरी दिशा में मोड़ रहा है। आतंकवादी घटनाओं में वांछित भारतीय नागरिकों को सौंपने तथा पाक नागरिकों के खिलाफ कारZवाई करते हुए आवश्यकता पड़ने पर भारत द्वारा कानूनी कारZवाई के लिए सुपूर्द करने की तैयारी यदि वह नहीं करता तो इसका अर्थ होगा भारत विरोधी आतंकवाद का पाकिस्तान सरकार द्वारा समर्थन। राजनयिकों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि मुंबई हमला भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने से रोकने के लिए किया गया था जिसे बरदाश्त नहीं किया जा सकता। अमेरिका की संघीय जांच ब्यूरो की जांच में पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान के एक अंग का हाथ होने की पुिष्ट के बाद भारत का पक्ष यकीनन मजबूत हो रहा है,लेकिन कदम तो पाकिस्तान को ही उठाना है। मुंबई आतंकवादी हमले के संदर्भ में पाकिस्तान द्वारा ठोस कारZवाई न करना भारत के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।

कोई टिप्पणी नहीं: