शनिवार, 3 जनवरी 2009

Assaam explosion 1 Jan 2008

गुवाहाटी विस्फोट
नए साल के पहले दिन गुवाहाटी में धमाका करने आतंकवादियों ने अपना इरादा जता दिया है। ये विस्फोट यद्यपि ज्यादा विनाशकारी नहीं थे, लेकिन समय और स्थान के हिंसाब से देखने पर इसके अर्थ काफी बड़े दिखाई देते हैं। गृहमंत्री पी. चिदम्बरम के गुवाहाटी पहुंचने के कुछ ही समय पहले विस्फोट किया गया। वे पुलिस, अर्धसैनिक बल एवं सेना के एकीकृत कमान तंत्र या यूनिफाइड कमांड स्ट्रक्चर की बैठक में शामिल होने के साथ सुरक्षा जायजा लेने गए हैं। भूतनाथ क्षेत्र से उन्हें गुजरना था और वहां साइकिल पर विस्फोटक रखकर विस्फोट किया गया। प्रधानमंत्री भी िशलॉंग में इंडियन साइंस कॉन्ग्रेस का उद्घाटन करने के पहले वहां पहुचंने वाले थे। जाहिर है, विस्फोट करने वालों ने गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री दोनों की यात्राओं को ध्यान में रखते हुए ही धमाका किया है। स्पश्टत: वे यह जताना चाहते थे कि नई सुरक्षा व्यवस्था के सामने उन्हें कमजोर एवं शांत नहीं मान लिया जाए। यानी वे सरकार की सारी व्यवस्थाओं को नकारते हुए हमला कर सकते हैं। इस प्रकार उन्होंने इस धमाके से प्रदेश व केन्द्र सरकार दोनों को सीधी चुनौती दी है। मुंबई हमले के बाद से देश में आतंकवादी खतरों के मद्दे नजर समग्र सुरक्षा तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने का जो कदम उठाया जा रहा है एवं चिदम्बरम गृहमंत्रालय संभालने के बाद जितनी सघनता से कार्य कर रहे हैं कम से कम असम में इसे अवश्य चुनौती दी गई है। इन धमाकों का संबध बंगलादेश चुनाव में शेख सहीना की भारी विजय से भी है। हसीना ने अपनी भूमि का आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं होने देने की घोशणा की है। बंगलादेश में जेहाद के नाम पर आतंकवाद फैलाने वाले संगठन शेख हसीना के खिलाफ हैं। उनके दिशा निर्देश पर या उनके साथ मिलकर काम करने वाले उल्फा ने इन विस्फोटों के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है। पुलिस का मानना है कि इस धमाके में उल्फा 709 बटालियन की भूमिका है। हालांकि इस समय उल्फा व दूसरे उग्रवादी संगठन विभक्त हैं। बंगलादेश स्थित आकाओं के निर्देश पर काम करने वाले सरकार के साथ बातचीत के विरुद्ध में हैं तो उनसे अलग होने वाले पक्ष में। उल्फा के दो समूहों अल्फा एवं चालीZ कंपनीज ने नेतृत्व से विद्रोह कर जून में ही युद्ध विराम घोशित कर दिया था। बंगलादेश स्थित उल्फा नेतृत्व उसके खिलाफ है। निश्चय ही इन विस्फोटों के द्वारा उन्होंने संघशZ विराम का भी विरोध किया है। जाहिर है, पूर्वोत्तर के संदर्भ में आतंकवादी विरोधी नीति बनाते समय हमें इस सारे पहलुओं का ध्यान रखना होगा। बंगलादेश पूर्वोत्तर सहित सम्पूर्ण भारत में आतंकवादी गतिविधियों का प्रमुख स्रोत बन चुका है। शेख हसीना के आने से इस स्थिति में परिवर्तन की जो संभावना दिख रही है उसे वास्तविकता में परिणत करना आवश्यक है। इसलिए आंतरिक सुरक्षा में चुस्ती के साथ बंगलादेश के साथ मिलकर अभियान चलाने के लिए बातचीत आंरभ की जानी चाहिए।

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