सत्यम या असत्यम
भारत की चौथी एवं दुनिया की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में शुमार होनेवाली सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज की ऐसी दुर्दशा की कल्पना किसी ने भी नहीं की होगी। लेकिन जब कंपनी के प्रोमोटर एवं प्रबंध निदेशक रामलिंगा राजू स्वयं बोर्ड को लिखे 7 जनवरी 2009 के पत्र में यह स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले सितंबर में उन्होने बिक्री एवं मुनाफे के जो आंकड़े दिए वे झूठे हैं तो फिर सामान्य तौर पर किसी के लिए कुछ कहने को रह ही नहीं जाता। राजू की स्वीकारोक्ति अचंभित करने वाली है। क्या यह सोचा भी जा सकता है कि बैलेंस शीट में से पांच हजार करोड़ रुपया कंपनी के पास था ही नहीं? या फिर 649 करोड़ का मुनाफा गलत बताया गया? या कर्जदारों पर कर्ज की ज्यादा रकम दिखाकर इसे वित्तीय दृष्टि से काफी मजबूत बताया जाता रहा है? अब यह भी साफ हो गया है राजू ने कंपनी को कुछ बड़ी निवेशक कंपनियों के हाथों 502 करोड़ में अपने सारे शेयर बेच दिया है जिसका अर्थ यही है कि यह कंपनी उन खरीदारों के पास गिरवी है। कुल मिलाकर 40 अरब रुपए के फर्जीबारे का यह भारतीय कॉरपोरेट जगत के भ्रश्टाचार में एक शर्मनाक रिकॉर्ड की तरह दर्ज हो गया है। राजू का नाम तो काले अक्षरों में आ गया, लेकिन इसकी तो जांच होनी चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में ये सारी गड़बड़ियां हुईं?आखिर किस हालत में राजू को कंपनी के अपने शेयर बेचने को मजबूर होना पड़ा? क्यों उसे झूठे बैलेंस शीट बनाने पड़े? इसकी जांच से दूसरी कंपनियों के बारे में भी अनुमान लगेगा। शेयर बाजार में इसका असर बुरा होना ही था। कुछ ही दिनों पहले जब विश्व बैंक ने सत्यम को घूस देकर आंकड़े चुराने का मामला प्रकाश में आने के साथ उसे काली सूची में डाला तो उसके समर्थन करने वाले भी सामने आ गए थे। इससे पूरे कॉरपोरेट जगत को संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। पता नहीं कितनी कंपनियों घाटे में जाने के बाद खाता बही में घपले करके शेयर बाजार में अपनी मजबूती बनाए रख रही होंगी। सरकार को इससे सबक लेते हुए शेयर बाजार एवं कॉरपोरेट के बारे में रवैया बदलना चाहिए। कौरपोरेट जगत अपने प्रभाव का प्रयोग कर ऐसी घपलेबाजी करते रहते हैं। इन पर टिका शेयर बाजार भी इसका िशकार होता है और सरकार हमेशा बाजार को बचाने के लिए धन भी झोंकती है। क्या सरकार के पास ऐसी मशीनरी है कि वह एक-एक कंपनी की अंदरुनी माली हालत का मूल्यांकन कर सके? ऐसी मशीनरी होनी तो चाहिए जो कि सख्ती से उनकी निगरानी कर सके। इन टिप्पणियों में भी बार-बार यह सुझाव दिया जा रहा है कि शेयर बाजार में जिन कंपनियों के भाव एक समय तेजी से चढ़े और जिनके तेजी से गिरे उन सबकी गहराई से जांच होनी चाहिए। सत्यम का मामला अकेला नहीं हो सकता।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें